Wednesday, October 19, 2016
Letter to Hotel manager inquiring about the room reservation
कक्षा आठ को मैं आई. सी. एस. ई का पाठ्यक्रम न कराकर उनकी भाषा को परिपक्व करने के लिए भाषा के विभिन्न पहलुओं पर काम करती हूं जैसे कि - व्याकरण के विभिन्न मुद्दों का अभ्यास, औपचारिक और अनौपचारिक पत्र लेखन ( २० साल से बोर्ड में आए हुए चित्रों पर), चित्र पर निबंध (चित्र वर्णन या कहानी - २० साल से बोर्ड में आए हुए चित्रों पर), कहावतों पर कहानी (२० साल से बोर्ड में आई हुई कहावतों पर), वर्णनात्मक -विवरणात्मक -काल्पनिक निबंध, अपठित गद्यांश आदि । औपचारिक और अनौपचारिक पत्र लेखन में से अनौपचारिक पत्र कक्षा आठ में सर्वप्रथम परिचित कराया जाता है पर इसमें भी केवल मित्र को पत्र लिखना सिखाया जाता है । औपचारिक में केवल प्रधानाचार्य और कक्षा अध्यापिका या अध्यापक को पत्र लिखना सिखाया जाता है । कक्षा नौ और दस में अन्य संस्थाओं और विभागों के अधिकारियों को पत्र लिखना सिखाया जाता है और अनौपचारिक में रिश्तेदारों और सम्बन्धियों को पत्र लिखना सिखाया जाता है । इन सभी पत्रों के विषय आई सी एस सी में आए हुए विषयों में से ही चुने जाते हैं । यही पत्र मैं यहाँ प्रकाशित कर रही हूँ जो बच्चों के द्वारा लिखे गए हैं । इन पत्रों में लिखी सामग्री न केवल छात्र और छात्राओं के लिए उपयोगी होगी बल्कि अध्यापक और अध्यापिकाओं के लिए भी उपयोगी होगी क्योंकि हर विषय के लिए सामग्री किसी भी पुस्तक में उपलब्ध होना मुश्किल है । विशेष रूप से छात्र और छात्राओं के लिए उनके ही हमउम्र के द्वारा लिखी सामग्री को समझना भी सरल होगा । आशा है कि आप सब को यह प्रयास अच्छा लगेगा और आप सब के लिए यह सामग्री उपयोगी सिद्ध होगी ।
Story on proverb- Sabe din ek jaat n saman सब दिन एक जात न समान
मैं
वैली स्कूल में आई. सी. एस. ई में
भी हिंदी पढ़ाती हूँ । इस बोर्ड
के हिंदी पेपर में कहावत के ऊपर एक
निबंध पूछा जाता है । बच्चों
से कई सारी कहावतों पर निबंध लिखाना
मुश्किल है इसलिए हर
छात्र-छात्रा को अलग-अलग
कहावत दी जाती है
जिस पर वे निबंध
लिखते हैं और फिर कक्षा
में सब छात्र-छात्राएँ
अपने लिखे निबंध पढ़ते हैं जिससे सबको कहावतें भी समझ आ
जाएँ और परीक्षा में
उन्हें कोई मुश्किल न हो ।
इन कहावतों पर लिखे निबंधों
को छात्र-छात्रों को सुनाया जा
सकता है या उन्हें
पढ़ने के लिए दिया
जा सकता है जिससे उन्हें
कहावतों का अर्थ अच्छी
तरह से समझ आ
सके । हर कहावत
के आगे वर्ष लिखा गया है , इसका मतलब है कि यह
कहावत बोर्ड में उस वर्ष में
पूछी गई है ।
आशा है कि यह
सामग्री अध्यापकों और अध्यापिकाओं के
साथ-साथ छात्र-छात्राओं के लिए भी
उपयोगी होगी ।
Story on proverb- Jahan Sumati tahan sampatti nana -जहाँ सुमति तहाँ सम्पत्ति नाना
मैं
वैली स्कूल में आई. सी. एस. ई में
भी हिंदी पढ़ाती हूँ । इस बोर्ड
के हिंदी पेपर में कहावत के ऊपर एक
निबंध पूछा जाता है । बच्चों
से कई सारी कहावतों पर निबंध लिखाना
मुश्किल है इसलिए हर
छात्र-छात्रा को अलग-अलग
कहावत दी जाती है
जिस पर वे निबंध
लिखते हैं और फिर कक्षा
में सब छात्र-छात्राएँ
अपने लिखे निबंध पढ़ते हैं जिससे सबको कहावतें भी समझ आ
जाएँ और परीक्षा में
उन्हें कोई मुश्किल न हो ।
इन कहावतों पर लिखे निबंधों
को छात्र-छात्रों को सुनाया जा
सकता है या उन्हें
पढ़ने के लिए दिया
जा सकता है जिससे उन्हें
कहावतों का अर्थ अच्छी
तरह से समझ आ
सके । हर कहावत
के आगे वर्ष लिखा गया है , इसका मतलब है कि यह
कहावत बोर्ड में उस वर्ष में
पूछी गई है ।
आशा है कि यह
सामग्री अध्यापकों और अध्यापिकाओं के
साथ-साथ छात्र-छात्राओं के लिए भी
उपयोगी होगी ।
जहाँ सुमति तहाँ सम्पत्ति नाना
जहाँ सुमति तहाँ सम्पत्ति नाना
Story on proverb- Jahan daya vahan dharm jahan lobh tahan paap -जहाँ दया वहाँ धर्म , जहाँ लोभ तहाँ पाप
मैं
वैली स्कूल में आई. सी. एस. ई में
भी हिंदी पढ़ाती हूँ । इस बोर्ड
के हिंदी पेपर में कहावत के ऊपर एक
निबंध पूछा जाता है । बच्चों
से कई सारी कहावतों पर निबंध लिखाना
मुश्किल है इसलिए हर
छात्र-छात्रा को अलग-अलग
कहावत दी जाती है
जिस पर वे निबंध
लिखते हैं और फिर कक्षा
में सब छात्र-छात्राएँ
अपने लिखे निबंध पढ़ते हैं जिससे सबको कहावतें भी समझ आ
जाएँ और परीक्षा में
उन्हें कोई मुश्किल न हो ।
इन कहावतों पर लिखे निबंधों
को छात्र-छात्रों को सुनाया जा
सकता है या उन्हें
पढ़ने के लिए दिया
जा सकता है जिससे उन्हें
कहावतों का अर्थ अच्छी
तरह से समझ आ
सके । हर कहावत
के आगे वर्ष लिखा गया है , इसका मतलब है कि यह
कहावत बोर्ड में उस वर्ष में
पूछी गई है ।
आशा है कि यह
सामग्री अध्यापकों और अध्यापिकाओं के
साथ-साथ छात्र-छात्राओं के लिए भी
उपयोगी होगी ।
जहाँ दया वहाँ धर्म , जहाँ लोभ तहाँ पाप
जहाँ दया वहाँ धर्म , जहाँ लोभ तहाँ पाप
Story on proverb-Bhagya ka nirmata manshya - भाग्य का निर्माता मनुष्य
मैं
वैली स्कूल में आई. सी. एस. ई में
भी हिंदी पढ़ाती हूँ । इस बोर्ड
के हिंदी पेपर में कहावत के ऊपर एक
निबंध पूछा जाता है । बच्चों
से कई सारी कहावतों पर निबंध लिखाना
मुश्किल है इसलिए हर
छात्र-छात्रा को अलग-अलग
कहावत दी जाती है
जिस पर वे निबंध
लिखते हैं और फिर कक्षा
में सब छात्र-छात्राएँ
अपने लिखे निबंध पढ़ते हैं जिससे सबको कहावतें भी समझ आ
जाएँ और परीक्षा में
उन्हें कोई मुश्किल न हो ।
इन कहावतों पर लिखे निबंधों
को छात्र-छात्रों को सुनाया जा
सकता है या उन्हें
पढ़ने के लिए दिया
जा सकता है जिससे उन्हें
कहावतों का अर्थ अच्छी
तरह से समझ आ
सके । हर कहावत
के आगे वर्ष लिखा गया है , इसका मतलब है कि यह
कहावत बोर्ड में उस वर्ष में
पूछी गई है ।
आशा है कि यह
सामग्री अध्यापकों और अध्यापिकाओं के
साथ-साथ छात्र-छात्राओं के लिए भी
उपयोगी होगी ।
भाग्य का निर्माता मनुष्य
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